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Reports on final hearing of Maruti workers’ case

Report on court hearing :: Jan 24, 2017

by Ramniwas (Provisional Working Committee, MSWU)

आज मारूति मामले की बहस के दौरान 13 मजदूरों 12 यूनियन मेंबर और जियालाल पर लगे आरोपों पर बहस हुई। बहस के दौरान मज़दूर पक्ष से अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर और रेबेका जॉन और राजकुमार उपस्थित रहे। आज अभियुक्तों की शिनाख़्त, पहचान, बरादमदगी, गवाहों के बयान पर बहस हुई। ज्यादातर गवाहों ने सिर्फ लिखित रूप से पूर्व नियोजित फॉर्मेट के अनुसार मजदूरों के नाम लिए हैं, कोई शारीरिक पहचान नहीं की है। सिर्फ एक बार फिजिकल आइडेंटिफिकेशन हुआ जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में सक्षम साक्ष्य नहीं माना है। जिस गवाह ने नाम लिया है वो पहचान नहीं पाया और जिसने पहचाना वो उस मज़दूर का रोल नहीं बता पाया। कंपनी के गवाहों के बयान पुलिस ने 7 दिन बाद लिए ताकि मामले को मनचाहा स्वरूप दे सकें। अनिल गौड़ जो अवनीश देव के साथ मौजूद था उनका पुलिस और अदालत में कोई बयान नहीं हैं। अभियुक्तों से 6 दिन बाद बरादमदगी दिखाई वो भी एक ही तरीके से जो संदेह के घेरे में है। जो भी सामान बरामद हुआ उसके बारे कहीं कोई साक्ष्य नहीं है कि वो डोर बीम और शॉकर मारुति के हैं या नहीं, ना ही कंपनी ने अपने स्टॉक में से इन चीजों के गायब होने के बारे में कोई दस्तावेज दिया है। वेल्ड शॉप के DPM ने अपने बयान में बताया कि उसने किसी भी मज़दूर को शॉकर या डोर बीम ले जाते हुए नहीं देखा और ना ही किसी सिक्योरिटी इंचार्ज ने इस बात की शिकायत की। किसी ने नहीं देखा कि असेम्बली शॉप और एडमिन ब्लॉक जो वेल्ड शॉप से 300 मीटर दूर है, में शॉकर डोर बीम कैसे पहुंचे। दीपक आनंद ने किसी भी चीज की शिनाख़्त नही की है और ना ही किसी बरामद सूची पर हस्ताक्षर किये हैं। अगली तारीख 27 जनवरी है।

Report on court hearing :: Jan 23, 2017

by Ramniwas (Provisional Working Committee, MSWU)

आज मारूति केस की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की और से जो बहस हुई उसके अनुसार 1) जिस व्यक्ति दीपक आंनद GM विजीलेंस ने मजदूरों के ख़िलाफ़ FIR कराई थी वो सुनवाई के दौरान किसी भी मज़दूर को पहचान नहीं सका। जिस भी दोषी ने गवाहों पर तथाकथित हमला किया, गवाहों ने उनके नाम से पुलिस में बयान दिया लेकिन ट्रॉयल के दौरान अपने साथ मारपीट करने वाले को पहचान नहीं सके। जिस भी गवाह ने जियालाल का नाम लिया है वो उसको पहचान नहीं पाया या उसने गलत शिनाख़्त की है। दीपक आंनद ने FIR में लिखवाया था कि 400 500 मज़दूर हाथों में सरिया, रॉड,बेलचा, डंडा लेकर HR में घुस कर मैनेजमेंट को पीटने लगे पर इसके विपरीत दीपक आंनद ने अपनी गवाही के दौरान बताया कि मजदूरों के हाथ में शॉकर और डोर बीम थे।दीपक आनंद की गवाही में अंतर्विरोध है जो कहीं भी स्थापित नहीं होती। घटनास्थल पर जांच अधिकारी ओम प्रकाश जब19 तारीख़ को सुबह 6 बजे फोटोग्राफर के साथ M1 रूम में पंहुचा तो वहां कुछ भी बरामद नहीं दिखाया और उसी दिन 12 बजे दोपहर को FSL अधिकारी डॉ सोनी ने जब M1 की जाँच की तब वहां से एक डोर फ्रेम और एक नयी माचिस बरामद दिखायी जहां पूरा कमरा जला हुआ था वहां माचिस पर कोई भी जले कटे का निशान नहीं था। उन्होंने ना तो बरामदगी की रिपोर्ट पर अपने हस्ताक्षर किये और ना ही वह कोर्ट में आकर उन माचिस और डोर बीम की बरामदगी की गवाही दी।

दूसरी बात आयी कंपनी के अंदर M1 रूम में आग लगने की। 6 लोगों ने अपनी गवाही में आग लगने के बारे में बताया था और तीन गवाहों ने आग लगाने वाले कुछ मजदूरों का नाम लिया था लेकिन तीनों में से कोई भी गवाह किसी भी मज़दूर को अदालत परिसर में पहचान नहीं पाया बल्कि एक गवाह ने गलत आदमी की शिनाख़्त की। किसी भी गवाह ने अपनी गवाही के दौरान इस बात की पुष्टि नहीं की की आग किसने लगाई और आग कैसे लगी। गवाह सलिल विहारी ने दोषी जियालाल को अपने पास बुलाकर विभागीय जांच की थी लेकिन इसके बावजूद भी अदालत परिसर में वो उसको पहचान नहीं सका।

अवनीश देव की डेड बॉडी M1 कमरे के अंदर से बरामद हुई और गवाहों ने M1 रूम के अंदर मार पीट की बात कही है और आग लगने की गवाही में यह बताया गया है कि M1 कमरे में आग बाहर से लगी है।अवनिश देव की मौत जलने के कारण नहीं बल्कि दम घुटने के कारण हुई थी ना की जलने के कारण और चोट लगने के कारण क्योंकि जिन गवाहों ने अपने ब्यान में कहा था कि जिन लोगों ने अवनीश देव पर हमला किया था उन्होंने उसके दाहिने पैर पर चोटें मारी थी जिससे कारण किसी की मौत नहीं हो सकती।

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Stay Vigilant as the Company-State-Judiciary Prepares to Sentence Maruti Workers: Stand with the Political Prisoners of Class Struggle

by Nayan

The final arguments in the Maruti workers case or the ‘State of Haryana vs Jiyalal & Others’ are ongoing. It is over from the State’s side, and now the hearing from the workers side are going on. 9 workers remain in Jail without Bail after 4-and-a-half years and 2 for over 2 years – which includes most members of the Union body and Jiyalal, the Dalit worker from Narwana among the ‘main accused’. 216 workers wait for the Judgement, majority of them having spent more than 4 years in Jail.

The prosecution has argued on 5 dates, 9, 16, 21 Dec 2016 and 9-10 January 2017. Satish, a Maruti worker who is helping other workers with the legal case said on it, “it does not feel like we are talking of legal arguments, but it rather feels like we are being made to sit on Judgement in a pre-decided case in front of the company.” He said, “For instance, on application moved on 21st December in Ram Meher vs State of Haryana argued that special Public Prosecutor representing the State, but even then the company’s legal cell representative, Vikas Pahwa, who can only assist, was arguing it out as if he was the State prosecutor. The Judge rather than questioning the Prosecution, attacked us instead.”

Earlier, having stayed over 3 years in Jail without Bail, 2 workers first got bail from the Supreme Court, and 1 from HC in March 2015, and 86 after that. Last year, with more than 4 years in Jail, 7 workers got bail on 11 September, 4 on 19th September, and 16 workers in August.

On 17th Jan, the first date of the final arguments from the workers side, the case of the 89 casual workers was argued, how the Police without a shred of evidence (and alphabetically!) arrested workers as directed by the Company. No witness has identified these workers. In fact, for eg. a worker Satbir wasn’t even named by anyone. The next two dates in the Trial Court (Gurgaon Sessions Court) are 23rd and 24th Jan. Tomorrow 23rd Jan at 11am, the lawyers from the side of the workers will give out statements to the press, so it is an appeal to pro-worker forces and friends in the media to please attend the same.

As the case proceeds towards a culmination, in a month or so, the (in)justice system is at full work to try and convict the workers, and possibly give long-term sentences like they did to the Pricol workers with ‘double life-time’ and such (which 6 of them recently got revoked from the HC, though sentence on 2 workers still remain in that case). It requires a resolute movement by workers and all pro-worker forces to shore up the resistance to the injustice system.

Also, Tomorrow morning from 9am, over 1000 contract HeroMotocorp workers – terminated from their jobs two months back due to demonetisation – will march from Hero Chowk Gurgaon till Rajiv Chowk and the DC Office Gurgaon. They will raise their own demands of reinstatement and abolition of contract system, and also join the fight for Justice with the symbol of resilient workers movement in the area, the Maruti workers as the final case hearings on Jailed Maruti Suzuki workers take place.

कंपनी-राज्य-न्यायपालिका द्वारा मारुती मजदूरों के ऊपर अटैक की तय्यारी चल रही हैं, सतर्क रहे! वर्ग संघर्ष के राजनीतिक कैदी के साथ खड़े हो!

साथियों मारुती मजदूरों का केस या ‘स्टेट ऑफ़ हरियाणा vs जियालाल और अन्य’ केस में फाइनल आर्गुमेंट चल रही है| कंपनी-सरकार-न्यायपालिका की अन्याय व्यवस्था मजदूरों कों लम्बी सजा देने के लिए पुरे जोर-शोर से तय्यारी कर रही है। सरकार की ओर से Final argument complete हो चुका है और मजदूरों के तरफ से 17 जनवरी से बहस शुरू हो चुकी है। 17 तारीख को मजदूरों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वरिन्दा ग्रोवर ने सी कैटेगरी के 89 मजदूरों के पक्ष में दलील पेश की । उन्होने अदालत के सामने पुलिस प्रबधन द्वारा, कंपनी के इसारे पर बनाए गए झूठे तथ्यों को उजागर किया कि किस प्रकार से 89 मजदूरों को बिना किसी गवाह की पहचान के चार साल तक जेल में बंद रखा । किसी भी गवाह ने इनकी शिनाख्त नहीं की । यहां तक की सतबीर पुत्र छोटू राम का किसी भी गवाह ने जिक्र तक नहीं किया । अगली कारवाई कल 23 जनवरी को सुबह 11 बजे सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रेबिका जोन की अगवाई में होगी । सभी से अपील है कि इस डेट पर आकर कोर्ट में बहस से देखें कि मजदूरों की ओर से हकीकत क्या रही।

जैसा कि आपको पता ही है कि साढे चार साल से आज भी मारुती के 9 साथी व 2 साथी लगभग दो साल से जेल में बंद हैं । हाई कोर्ट में सभी साथियों की जमानत लगे तीन महीनों से ज्यादा समय हो गया है लेकिन अभी तक कोई कार्य वाही नहीं हुई और शायद होगी भी नहीं क्योंकि केस अंतिम चरण में चल रहा है और इसलिये जमानत की डेट को लगातारआगे बढाया जा रहा है।

इसके साथ ही, कल सुबह हीरोमोतोकोर्प के 1000 से ज्यादा ठेका मज़दूर – जिन्हें नोतबंदी के कारन दो महीने पहले अपने काम से निकल दिया गया – हीरो चौक गुडगाँव से DC कार्यालय गुडगाँव तक रैली करेंगे| यह काफी हौसले की बात है की वो अपने डिमांड: काम पर वापस लेना और ठेकेदारी प्रथा ख़तम करने, के साथ इस इलाके में संघरशील मज़दूर आन्दोलन के प्रतीक मारुती सुजुकी के जेल में बंद साथियो की न्याय की मांग के साथ भी खड़े है|

For more information, contact: Khusiram: 9911258717, Raminwas: 8901127876 from the Provisional Working Committee, Maruti Suzuki Workers Union

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