Delhi, Apr 23: Public meeting on “Eroded Democracy: The Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) & Political Trials”

*PEOPLES UNION FOR DEMOCRATIC RIGHTS (PUDR)*

*Public Meeting Invite*

*Eroded Democracy: The Unlawful Activities Prevention Act (UAPA) & Political Trials*

*Speakers*: Arun Ferreira (Committee for the Protection of Democratic Rights), Sharfuddin Ahmed (People’s Movement Against UAPA), Gautam Navlakha (People’s Union for Democratic Rights)

*Date:* 23rd April 2017, *Time:* 3.45 pm onwards, *Venue:* Auditorium, Indian Social Institute, 10, Institutional Area, Lodhi Colony, New Delhi, Delhi 110003 (Near Sai temple)

Facebook: https://www.facebook.com/events/1920833814819653/

PUDR Web Link:
http://pudr.org/content/23042017-eroded-democracy-unlawful-activities-prevention-act-uapa-political-trials

When ideologies contrary to or critical of those espoused by the State thrive on the basis of mass support, the State attempts to scuttle all voices in support of these ideologies. In such a situation, all people associated with or deemed to be associated with struggles are declared
‘anti-nationals’ or ‘insurgents’. Fundamental freedoms and democratic rights such as speaking, writing, thinking, reading, participating or organising in favour of the struggles are also targetted. People are put behind bars. In this context, draconian and biased laws like the Unlawful Activities (Prevention) Act, 1967 are put to use by the State. The UAPA is one of those black laws of the country which is in blatant disregard of the Constitutional rights and makes the struggle for enforcing Democratic Rights one step difficult. Under this law, basic norms of the Criminal Justice System meant for safeguarding rights of the Accused are also kept at abeyance. Thousands of Adivasis, Kashmiris, North-Eastern people in the Armed Conflict Areas and Muslims who have been declared terrorists even before completion of trials have become routine sufferers of this draconian law today. The judgment delivered by the Gadchiroli Sessions Court on 7th March 2017 wherein 6 persons were convicted for life under provisions of
UAPA is a stark example of the abovesaid.

In this context, PUDR is organising a meeting on UAPA. The discussion will revolve around the history of UAPA, its provisions, its application on ground. Attempt will be to understand how this law is being used to proscribe or ban organisations and to incarcerate political activists. It is hoped that the discussion will help us run a focussed campaign around the repeal of UAPA and the release of Political Prisoners.

PUDR invites you and your organisation to participate in the discussion.

Contact – 9818405329

*पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर)*

*आम सभा निमंत्रण*

*उजड़ता लोकतंत्र – यूएपीए और राजनैतिक मुकदमें*

*वक्ता *– अरुण फरेरा (कमिटी फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ डेमोक्रेटिक राइट्स, मुंबई),
शरफुद्दीन अहमद (पीपल्स मूवमेंट अगेंस्ट यूएपीए), गौतम नवलखा (पीयूडीआर)

*दिनांक – *23 अप्रैल 2017, *समय* – शाम 3.45 बजे, *जगह* – आईएसआई, लोधी रोड,
साईं मंदिर के पास, नई दिल्ली, जवालाहर लाल नेहरु स्टेडियम मेट्रो स्टेशन के
पास

फेसबुक : https://www.facebook.com/events/1920833814819653/

पीयूडीआर वेबसाइट लिंक : http://pudr.org/events

जब राजसत्ता की विचारधारा के विरुद्ध या उसकी आलोचना करती कोई विचारधारा पनपती
है और जनता से बड़े स्तर पर समर्थन प्राप्त करती है तो बौखलाकर सत्ताधारी उस
विपरीत विचारधारा के समर्थन में उठती आवाजों को कुचलने की कोशिश करते हैं |
ऐसे में उस संघर्ष से जुड़े या जुड़े हुए प्रतीत होते सभी लोगों को राजद्रोही
घोषित कर दिया जाता है | संगठनों को प्रतिबंधित किया जाता है | संघर्ष के
समर्थन में बोलने, लिखने, सोचने, पढने, संगठित होने जैसी मूलभूत आजादियों और
जनवादी अधिकारों पर भी निशाना साधा जाता है | लोगों को जेलों में बंद कर दिया
जाता है | इसी परिप्रेक्ष्य में यूएपीए जैसे एकतरफा और काले क़ानून राजसत्ता के
फायदे के लिए प्रयोग में लायें जाते हैं | *विधिविरुद्ध क्रिया-कलाप (निवारण)
अधिनियम, 1967* या यूएपीए हमारे देश के उन काले कानूनों में से एक है जो न
सिर्फ संविधान में दिए मूलभूत अधिकारों का धड़ल्ले से हनन करता है बल्कि जनवादी
अधिकारों को अमल में लाने के लक्ष्यों को कोसों दूर कर देता है | इस क़ानून के
अंतर्गत अपराधप्रणाली में उन मूलभूत नियमों को भी ताक पर रख दिया जाता है जो
आम तौर पर अभियुक्त के हितों की रक्षा के लिए लागू होते हैं | सशस्त्र संघर्ष
क्षेत्रों में जेलों में सढ़ रहे हज़ारों आदिवासी, कश्मीरी, उत्तर-पूर्वी लोग और
अभियोग से भी पहले आतंकवादी घोषित किये गये मुसलमान आज इस काले क़ानून के दमन
चक्र के नियमित भुक्तभोगी बन चुके हैं | 7 मार्च 2017 को गदचिरोली सत्र
न्यायालय द्वारा दिया गया फैसला इन बातों को प्रखर रूप से चिन्हित करता है
जहां 6 लोगों को यूएपीए की धाराओं के तेहत अपराधी घोषित किया गया और आजीवन
कारावास की सजा सुनाई गई |

इस सन्दर्भ में पीपल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स (पीयूडीआर) यूएपीए के
बारे में एक चर्चा आयोजित कर रहा है | चर्चा में इस काले क़ानून के इतिहास,
इसके प्रावधानों और ज़मीनी स्तर पर इसे किस प्रकार लागू किया जा रहा है, इसे
समझने का प्रयास किया जाएगा | यह समझने का प्रयास किया जाएगा की कैसे इस क़ानून
के उपयोग से संगठनों को प्रतिबंधित किया जा रहा है और राजनैतिक कार्यकर्ताओं
को बंदी बनाया जा रहा है | उद्देश्य है की इस चर्चा के बाद यूएपीए को रद्द
करने और राजनैतिक बंदियों की रिहाई की मांग के लिए आन्दोलन को और केन्द्रित
किया जा सके |

आपको और आपके संगठन को पीयूडीआर इस चर्चा में भाग लेने के लिए आमंत्रित करता
है |

संपर्क – 9818405329

Cijoy Joy, Anushka Singh

Secretaries, PUDR

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