Delhi, Oct 5: appeal to rise against the killing of Gauri Lankesh and to march for democracy

Appeal to rise against the assassination of Gauri Lankesh and to march for democracy
The assassination of Gauri Lankesh, two years after a similar horror was perpetrated on scholar M.M.Kalaburgi in Karnataka, is not an isolated act. The murder of rationalists Govind Pansare and Narendra Dabholkar in Maharashtra in the very same fashion earlier also follow the same eerie pattern. These killings are inseparable from the chain of killings of Dalits and Muslims in the name of ‘cow protection’, ‘religion’ etc. It is the dangerous continuation of the spread of right wing ideology which has started in 1990s. There have been many threats to activists who have been countering communalism, and this has continued even after her death, with the killing of Santanu Bhowmick and as seen from the way eminent Bahujan academic Kancha Iliah was grieviously threatened and even physically attacked.

As the first step in this process of building a strong resistance, we request one and all to join hands in an all India coordinated mobilization for Justice for Gauri on October 5th.

In Delhi, this mobilization will take the form of a rally on October 5th
TIME: 1 pm
PLACE: Mandi House to Jantar Mantar.

We ask that you participate from the banners of mass organizations and social organizations. We do not wish to have any political parties attend under their banner. Please bring your own placards and banners accordingly. We ask that everyone come and march in two rows behind the main banner, and that people do not crowd around or before the main banner leading the march. The march will have only two rows starting from the very front. Please see the list of participating mass organizations at the bottom of this email and confirm that your group is listed; if not please reply to ensure inclusion. All the participating groups’ names will be called out from the stage.

We request all people to join this rally in the largest possible numbers. In several parts of India there will also be programs for Justice for Gauri on the same day. The question is: did those who killed Gandhi kill Gauri too? The enquiry process will reveal who the perpetrators of her killing are. Meanwhile the silence of the Prime Minister on the justification and celebration of Gauri’s assassination by people who are in various ways linked to the ruling dispensation is unacceptable in a civilized society.

Being a founder member of Karnataka Komu Souharda Vedike (The Communal Harmony Forum, Karnataka), Gauri Lankesh was actively involved in the resistance against reactionary forces along with other progressive sections of Karnataka who had responded pro-actively and consistently to counter the growth of such trend in the society. Yet the above assassinations and other developments clearly demonstrate that whatever has been done is just not sufficient to counter their terror. But after the killing of Gauri Lankesh a stronger reaction has come from various sections of society with whom she had pledged her solidarity, including artists (including ‘mainstream’ cinema), journalists, ex-civil service officers, legal fraternity including former judges, academicians, religious heads (especially the Viraktha Basava tradition Swamijis of Karnataka), LGBT community etc and more. Youth and students formed the major chunk of the different mobilisations against this killing. So, NOW is the time to respond. We appeal to every individual and collective, all those who think and feel for the future of humanity as a whole, to come forward and support the voice of unity for a harmonious and vibrant society.

Demand that the police investigation primarily focuses on the most probable killers and the real political actors behind them as is the normal procedure. The most probable killers here are obviously only those who were Gauri’s main adversaries, the most retrogressive forces which had threatened to kill Gauri and which have justified and celebrated her killing. We demand that the state government in Karnataka expedites action in this direction by all means.
We insist above all that it is the utmost responsibility of the offices that are supposed to safeguard the constitutional values to discharge their duty impartially. But unfortunately the present dispensation in the centre is unashamedly upholding and supporting the forces which are destroying communal harmony and democratic values that are entrenched in our society. Hence it is all the more necessary that ‘we the people of India’ apply moral and political pressure on the prevailing regime, such that an unbiased enquiry is conducted not only to arrest the criminals behind the acts but also the extra constitutional forces behind them.

Teesta Setalvad (Journalist, Activist, Educationist, Forum against the assassination of Gauri Lankesh)
Jignesh Mevani (Rashtriya Dalit Adhikar Manch, Forum against the assassination of Gauri Lankesh)
Kavita Krishnan (AIPWA, Forum against the assassination of Gauri Lankesh)
Annie Raja, NFIW
Shabnam Hashmi, Anti-communal activist
Mariam Dhawale, AIDWA
Poonam, Pragatisheel Mahila Sangathan (PMS)
Ovais Sultan Khan, Anhad
Rajni Tilak, Rashtriya Dalit Mahila Andolan
Bittu, Karnataka Janashakti, WSS
Anand Patwardhan (Film maker, Forum against the assassination of Gauri Lankesh)
Irfan engineer (Anti communal activist, Forum against the assassination of Gauri Lankesh)
Narayana Rao, Telangana (Civil Liberties Committee, Forum against the assassination of Gauri Lankesh)
K. Neela (AIDWA, Forum against the assassination of Gauri Lankesh)
Vasu (Karnataka Janashakti, Forum against the assassination of Gauri Lankesh

गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ और लोकतंत्र के लिये जुलूस
पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या से पूरे देश में आक्रोश की लहर फैल गई है। हमारा मानना है कि कर्नाटक में प्रख्यात विद्वान एम. एम. कलबुर्गी की हत्या के दो साल बाद गौरी लंकेश की हत्या कोई अलग-थलग घटना नहीं है। इससे पहले गोविंद पान्सारे और नरेंद्र दाभोलकर जैसे तर्कवादियों की महाराष्ट्र में जो हत्याएं हुई वे भी इन हत्याओं से मिलती-जुलती रही हैं। इसके अलावा, इन हत्याओं को पूरे देश में ‘गौ-रक्षा’, ‘धर्म’ आदि के नाम पर दलितों और मुस्लिमों पर हुए हमलों से अलग-थलग करके नहीं देखा जा सकता है। ये सारी घटनाएं 1990 के दशक से जारी दक्षिणपंथी विचारधारा के खतरनाक फैलाव का ही हिस्सा है।ऐसे कार्यकर्ताओं के लिए कई खतरे हैं जो सांप्रदायिकता का मुकाबला करते हैं, और यह उनकी मृत्यु के बाद भी जारी है, शान्तनु भौमिक की हत्या, अौर बहुजन बुद्धिजीवि कांचा ऎलैयाह को धमकी दी गयी थी और शारीरिक रूप से भी उनपर हमला किया गया। सांप्रदायिकता का मुकाबला करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए कई खतरे रहे हैं, और गौरी की मृत्यु के बाद भी यह जारी रहा है, जैसे संतनु भौमिक की हत्या और बुद्धिजीवि कांचा ऎलैयाह को गंभीर रूप से धमकी और शारीरिक रूप से हमला की कोशिश भी दिखाती है।
इसकॆ प्रतिरोध की प्रक्रिया में पहले कदम के तौर पर हम आपसे अपील करते हैं कि 5 अक्टूबर को ‘जस्टिस फ़ॉर गौरी’ (गौरी को न्याय दो) के लिए अखिल भारत लामबंदी में शामिल हों। दिल्ली में यह आंदोलन 5 अक्टूबर 2017 को 1 बजे मंडी हाउस से जंतर-मंतर तक की एक रैली की शक्ल में होगा।
समय: 1 pm
जगह: Mandi House to Jantar Mantar.
हम आपसॆ निवॆदन करतॆ हैं कि आप जन संगठनों और सामाजिक संगठनों के बैनर से भाग ले न कि किसी राजनीतिक दल कॆ तरफ सॆ। कृपया इस कॊ मन मॆ रखकॆ अपने प्लॆकार्ड और बैनर लाएं। हम सभी से पूछते हैं कि हर कोई दॊ लाईन मॆ मुख्य बैनर के पीछे आए, और् मुख्य बैनर के चारों ओर या उससे पहले भीड़ न बनाए। कृपया इस ईमेल के निचले भाग में भाग लेने वाले जन संगठनों की सूची देखें और बॊलॆ अगर आपका समूह उसमॆ सॆ नही है। सभी भाग लेने वाले समूहॊ के नाम को मंच से बुलाया जाएगा।
हम सबसे अपील करते हैं कि इस रैली में बढ़चढ़ कर हिस्सा लीजिए। इसी दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में ‘गौरी के लिए न्याय’ का नारा बुलंद किया जाएगा। इसके अलावा 2 अक्टूबर को देश के अलग-अलग हिस्सों में गांधी की मूर्तियों/गांधी मेमोरियलों व ऐसे दूसरे सार्वजनिक जगहों पर होने वाले विकेन्द्रीकृत रूप से संयोजित धरनों में भाग लेने की अपील भी हम करते हैं। हमारा सवाल है कि गांधी के हत्यारों जवाब दो – क्या गौरी को भी तुम्ही ने मारा? जान्च सॆ पता चलॆगा कि गौरी कॆ हत्यारॆ कौन है। पर जब प्रधान मन्त्रि सॆ जुडॆ लॊगो नॆ गौरी कि हत्या कॊ जायिज़ बताकॆ जश्न मनाया, जिस तरह सॆ प्रधान मन्त्रि नॆ चुप्पी साध ली है, उससॆ गम्भीर सवाल पैदा हॊतॆ है। दिल्ली में होने वाले व्यापक आंदोलन का केन्द्रीय मुद्दा यही है।
गौरी लंकेश ‘कर्नाटक कौमू सौहार्दा वेदिके’ (साम्प्रदायिक सौहार्द मंच, कर्नाटक) की संस्थापक सदस्यों में से एक थीं और वे कर्नाटक के उन तमाम प्रगतिशील तबकों के साथ खड़ी थीं जो प्रतिक्रियावादी प्रवृतियों व ताकतों के खिलाफ़ प्रतिरोध में खुलकर सक्रिय हैं। लेकिन गौरी लंकेश और उससे पहले की हत्याओं और तमाम हमलों से यह बात ज़ाहिर होती है कि एक न्यायपूर्ण समाज के निर्माण की हमारी लड़ाई आज के दौर की प्रतिक्रियावादी ताकतों का सामना करने में अपर्याप्त साबित हो रही है। लेकिन इसके बावजूद गौरी लंकेश की हत्या से समाज के अलग-अलग हिस्सों में एक जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई है जिसमें कलाकार (यहां तक कि मुख्यधारा के सिने कलाकार भी), पत्रकार, भूतपूर्व नौकरशाह, कानूनी विशेषज्ञ, वकील व अनेक सेवानिवृत जज, शिक्षक-शिक्षिकाएं, धर्मगुरू (खासतौर से कर्नाटक में विरक्थ बासवा परम्परा के स्वामी), एल.जी.बी.टी. समुदाय के लोग और दूसरे अनेक तबके शामिल हैं। विरोध की इन मुखर आवाज़ों में युवाओं और विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है। इन विरोध प्रदर्शनों में जिस तरह से आम लोग सड़कों पर उतरे हैं और सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने आक्रोश को जिस तरह की रचनात्मकता के साथ अभिव्यक्त किया है वह अभूतपूर्व है।
हम यह मांग करते हैं, कि पुलिस की तहकीक़ात में गौरी के संभावित हत्यारों और उनके पीछे खड़े असल राजनीतिक किरदारों को बेनकाब किया जाना चाहिए। संभावित हत्यारों की सूची में सबसे ज़ाहिर नाम उन प्रतिक्रियावादी ताकतों के हैं जो गौरी के दुश्मन थे और जिन्होंने गौरी की हत्या को न सिर्फ सही ठहराया बल्कि उसका जश्न मनाया है। हमारी मांग है कि कर्नाटक सरकार अपनी पूरी ताकत के साथ इस दिशा में कार्यवाही तेजी से आगे बढ़ाए।
हम इस बात पर ज़ोर देना चाहते हैं कि संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए जवाबदेह सार्वजनिक पदाधिकारी व निकाय अपनी ज़िम्मेदारी निष्पक्षता से निभाएं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज केन्द्र सरकार में बैठे तत्व समाज को तोड़ने वाले, लोकतंत्र विरोधी, दकियानूसी व प्रतिक्रियावादी ताकतों के साथ बड़ी बेशर्मी से खड़े हैं। ऐसी परिस्थिति में यह और भी जरूरी है कि “हम, भारत के लोग” हुक्मरानों पर यह नैतिक व राजनीतिक दबाव बनाएं कि गौरी हत्याकांड की निष्पक्ष जांच सिर्फ गोली चलाने वाले हत्यारों को ही पकड़ने के लिए नहीं बल्कि उनके पीछे खड़ी संविधान-विरोधी ताकतों को भी न्याय के कठघरे में खड़ा करने के मकसद से की जानी चाहिए।
तीस्ता सीतलवाड (पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्शक‌, गौरी लंकेश हत्याकांड विरोधी मंच)
जिग्नेश मेवाणी (राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच, गौरी लंकेश हत्याकांड विरोधी मंच)
कविता कृष्णन (AIPWA, गौरी लंकेश हत्याकांड विरोधी मंच)
ऎनि राजा, NFIW
शबनम हाशमी, सांप्रदायिकता विरोधी कार्यकर्ता
मरियम धावले, AIDWA
पूनम, प्रगतिशील महिला संघठन‌ (PMS)
रजनी तिलक, RDMA
ओवैस सुल्तान खान, अन्हद
बिट्टू, कर्नाटक जनशक्ति, डब्ल्यूएसएस
आनंद पटवर्धन (फिल्म निर्माता, गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ फोरम)
इरफान इंजीनियर (विरोधी सांप्रदायिक कार्यकर्ता, गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ फोरम)
नारायण राव, तेलंगाना (सिविल लिबर्टीज कमेटी, गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ फोरम)
के नीला (AIDWA, गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ फोरम)
वासु (कर्नाटक जनशक्ति, गौरी लंकेश की हत्या के खिलाफ फोरम)
Organized in Delhi by:
Adivasi Adhikar Rashtriya Manch * AICCTU * AIDWA * AIFRTE * AIKS * AIKS * AIPM * AIPWA * AISA * AISF * AITUC * AIUFWP * AIUTUC * AIYF * All India Agricultural Workers Union * All India People’s Science Network * Anhad * Basti Suraksha Manch * BASO * CDRO * Cinema of Resistance * Citizens for Justice and Peace, Mumbai * CITU * CSW * CYSS * Dalit Shoshan Mukti Manch * Delhi Forum * Delhi Science Forum * Gati Dance Forum * Indian Council of Trade Unions* * IFTU * IMK * INSAF * Jan Sanskriti * Janvadi Lekhak Sangh * JMS * JNM * JNUSU * JSM * JSV * Karnataka Janashakti * Karnataka Komu Sauharda Vedike * KNS * KYS * Muslim Women’s Forum * NACDOR * NAPM * NFIW * NTUI * Parcham * Pratirodh * Pragatisheel Mahila Sangathan * Progressive Writers’ Association * PADS * PDSU * PSA * PUCL * RDMA * Right to Education Forum * RYA * Sahmat * SASC * Samajwadi Samagam * Sangwari * SFI * Siksha * SIO *Sruti * SUCI Haryana * Swaraj Abhiyan * TUCI *


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